माँ
कर्णिका जीवगण
सातवी 'ब '
बहुत कोमल बहुत निर्मल
याद हमें करती पलपल
वही तो देती है मनोबल
हर दम पास होती आज हो या कल
वही हमें दुनिया में लायी
हमें देख बहुत ख़ुशी पाई
अंत थक रहेगी बन कर परछाई
है अनोखी यह भगवान की कृति
रोती हंसती सबकुछ करती
दुख कभी न अपना बतलाती
तुझसे ही सीखा मैंने चलना फिरना
तुमने ही न्योछावर किया मुझ पर प्यार का झरना!
ममता की सागर है तू ,
ग्नान का मंडार है तू
हमें अच्छा इंसान बताती है तू
कर्णिका जीवगण
सातवी 'ब '
याद हमें करती पलपल
वही तो देती है मनोबल
हर दम पास होती आज हो या कल
वही हमें दुनिया में लायी
हमें देख बहुत ख़ुशी पाई
अंत थक रहेगी बन कर परछाई
है अनोखी यह भगवान की कृति
रोती हंसती सबकुछ करती
दुख कभी न अपना बतलाती
तुझसे ही सीखा मैंने चलना फिरना
तुमने ही न्योछावर किया मुझ पर प्यार का झरना!
ममता की सागर है तू ,
ग्नान का मंडार है तू
हमें अच्छा इंसान बताती है तू

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