Monday, 23 December 2013

चार मुक्तक

अनूप भार्गव
राजस्थान में जन्मे अनूप भार्गव ने पिलानी से इंजीनियरिंग में स्नातक और उसके बाद आई आई टी दिल्ली से स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की। पिछले काफी समय से वे अमेरिका के न्यूजर्सी राज्य में स्वतंत्र कंप्यूटर सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।

वे अमेरिका में अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के माध्यम से हिंदी संबंधी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
उनका चिट्ठा- 'आओ कि कोई ख्वाब बुनें'यहाँ पढ़ा जा सकता है।

संपर्क :helloanoop@gmail.com 

चार मुक्तक

एक

प्रणय की प्रेरणा तुम हो
विरह की वेदना तुम हो
निगाहों में तुम्हीं तुम हो
समय की चेतना तुम हो

दो

तृप्ति का अहसास तुम हो
बिन बुझी सी प्यास तुम हो
मौत का कारण बनोगी
ज़िन्दग़ी की आस तुम हो

तीन

सुख दुख की हर आशा तुम हो
चुंबन की अभिलाषा तुम हो
मौत के आगे जाने क्या हो
जीवन की परिभाषा तुम हो

चार

सपनों का अध्याय तुम्हीं हो
फूलों का पर्याय तुम्हीं हो
एक पंक्ति में अगर कहूँ तो
जीवन का अभिप्राय तुम्हीं हो
 

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