Thursday, 25 October 2012

यह हिंदुस्तान है अपना

 धन्यवाद
“कोई काम शुरू करने से पहले, स्वयं से तीन प्रश्न पूछिए – मैं यह क्यों कर रहा हूँ, इसके परिणाम क्या हो सकते हैं और क्या मैं सफल हो पाऊंगा। जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर मिल जायें, तब आगे बढ़ें।” - चाणक्य
“हमें भूत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, न ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए; विवेकी व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।” - चाणक्य
यह हिंदुस्तान है अपना
हमारे युग-युग का सपना
हरी धरती है नीलगगन
मगन हम पंछी अलबेले

मुकुट-सा हिमगिरि अति सुंदर
चरण रज लेता रत्नाकर
हृदय गंगा यमुना बहती
लगें छ: ऋतुओं के मेले

राम-घनश्याम यहाँ घूमे
सूर-तुलसी के स्वर झूमे
बोस-गांधी ने जन्म लिया
जान पर हँस-हँस जो खेले

कर्म पथ पर यह सदा चला
ज्ञान का दीपक यहाँ जला
विश्व में इसकी समता क्या
रहे हैं सब इसके चेले।

 धन्यवाद - डॉ. गोपालबाबू शर्मा
Thanks: Gopal Babu Sharma


    यदि देश हित मरना पड़े मुझ को सहस्त्रों बार भी ।
    तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाउं कभी ।।
    हे ईष भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो ।
    कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो ।।

    सर फ़रोशाने वतन फिर देखलो मकतल में है ।
    मुल्क पर कुर्बान हो जाने के अरमां दिल में हैं ।।
    तेरा है जालिम की यारों और गला मजलूम का ।
    देख लेंगे हौसला कितना दिले कातिल में है ।।
    शोरे महशर बावपा है मार का है धूम का ।
    बलबले जोशे शहादत हर रगे बिस्मिल में है


Thanks :RAM PRASAD BISMIL

 

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